डिजिटल अरेस्ट का नया खौफनाक खेल: 'CBI अफसर' बन बुजुर्ग को 72 घंटे कैमरे के सामने रखा कैद, ठग लिए 1.5 करोड़ रुपये!
विशेष संवाददाता, नोएडा: साइबर अपराध की दुनिया में इन दिनों 'डिजिटल अरेस्ट' का आतंक तेजी से पैर पसार रहा है। उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां शातिर साइबर ठगों ने कानून और जांच एजेंसियों का डर दिखाकर एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी को उन्हीं के घर में लगातार 72 घंटे तक बंधक बनाए रखा। फर्जी मुकदमों और गिरफ्तारी की धमकी देकर जालसाजों ने बुजुर्ग की जीवनभर की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई यानी 1.5 करोड़ रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
फर्जी पार्सल और मनी लॉन्ड्रिंग का दिखाया डर:
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित बुजुर्ग के पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को कोरियर कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए दावा किया कि ताइवान भेजे जा रहे एक पार्सल में नशीले पदार्थ और कई जाली पासपोर्ट बरामद हुए हैं, जो उनके आधार कार्ड से लिंक हैं। इससे पहले कि बुजुर्ग कुछ समझ पाते, कॉल को तथाकथित 'सीबीआई और मुंबई पुलिस' के अधिकारियों को ट्रांसफर कर दिया गया। वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स सामने आया, जिसने बैकग्राउंड में सरकारी दफ्तर जैसा सेट-अप तैयार कर रखा था।
72 घंटे तक लगातार कैमरे की निगरानी में कैद:
ठगों ने बुजुर्ग पर राष्ट्रीय सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर आरोप लगाते हुए फर्जी सुप्रीम कोर्ट के वारंट और अरेस्ट ऑर्डर व्हाट्सएप पर भेजे। इसके बाद उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया गया। आरोपियों ने बुजुर्ग को सख्त हिदायत दी कि वे 'डिजिटल कस्टडी' में हैं और अगर उन्होंने फोन काटा या परिवार के किसी सदस्य से संपर्क किया, तो पुलिस की गाड़ी सीधे घर पहुंचकर उन्हें जेल में डाल देगी। बुजुर्ग इतने सहम गए कि वे तीन दिन और तीन रात तक बिना सोए, बिना कमरे से बाहर निकले सिर्फ वीडियो कॉल के कैमरे के सामने बैठे रहे।
सत्यापन के नाम पर खाली करवा लिए सारे खाते:
बुजुर्ग को पूरी तरह अपने मानसिक शिकंजे में कसने के बाद जालसाजों ने कहा कि उनके बैंक खातों की जांच 'आरबीआई के गोपनीय सत्यापन खाते' के जरिए की जानी जरूरी है। इसके बाद क्लीन चिट देने का झांसा देकर पीड़ित से उनकी सेविंग्स और वर्षों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तुड़वाकर 1.5 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। जैसे ही पैसे ट्रांसफर हुए, सभी नंबर बंद हो गए और वीडियो कॉल कट गई। जब बुजुर्ग को ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने परिजनों के साथ साइबर सेल थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल खातों को फ्रीज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें:
साइबर विशेषज्ञों और पुलिस का स्पष्ट कहना है कि भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम की कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी या कस्टम विभाग कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं करता। यदि आपको ऐसी कोई धमकी भरी कॉल आए, तो घबराने के बजाय तुरंत कॉल डिस्कनेक्ट करें और 1930 पर या स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।
आपकी राय: क्या आपको या आपके किसी परिचित को कभी इस तरह की संदिग्ध कॉल आई है? डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर पुलिस को क्या कदम उठाने चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें!

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